इस नवरात्रि मां दुर्गा के नौ बीज मंत्रों का करें जाप, घर में आएगी शांति
नवरात्रि में अगर आप भी कर रहे हैं मां की पूजा तो जानें क्यों जरुरी है नौ देवियों के मंत्रो का जाप, माता का बना रहेगा आर्शीवाद.
नवरात्रि के पूजा का हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व होता है, लोग इस दौरान नो दिनों का व्रत रखते हैं और घर पर ही मन से पूजा करते हैं. कई सारे लोग नौ दिनों तक कलश की स्थापना करते हैं. ऐसे में हर कोई चाहता है कि मां उनसे प्रसन्न रहें ताकि उसके घर में शांति और सुख का वास रहे. लोग मां की पूजा में और उनके भोग में उनके पंसद की चीजों को चढ़ाते हैं ताकि माता को किसी तरह की कोई कमी ना रह जाए, लेकिन आप शायद ही इस दौरान मां दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप करते होंगो.
नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रुपों की पूजा की जाती है, हर दिन उनके अलग-अलग रुपों को पूजा जाता है जिसकी अपनी अलग अहमियत होती है. ऐसे में आप अगर मां की पूजा कर रहे हैं तो ऐसे में आपको दुर्गा के बीज मंत्रों का जाप करना चाहिए क्योंकि वो बेहद ही कल्याणकारी और प्रभावी माने जाते हैं. हालांकि इस दौरान आप बेहद संभलकर और ध्यान से इन मंत्रों का जाप करें आपसे कोई गलती नहीं होनी चाहिए. तो चलिए जानते हैं कि मां दुर्गा के नौ रुपों के बीज मंत्र क्या हैं.
कब से शुरु है पूजा
इस बार मां की पूजा 7 अक्टूबर से होगी, इसी दिन घट की स्थापना होगी और पूरे नौ दिन मां की पूजा चलती है. 15 अक्टूबर को नवरात्रि का समापन होगा. इन नौ दिनों मां की पूजा बहुत धूम धाम से की जाती है. ऐसे में भक्त कई बार असमंजस में पड़ जाते है कि हर दिन देवी के अलग स्वरूप की पूजा की जाती है, तो किस देवी के नाम का जाप किया जाए ताकि सभी देवियों का आशिर्वाद मिल सके. हम आपको बता रहे हैं कौन से दिन आपको कौन से मंत्र का जाप करना है ताकि देवी आपसे हमेशा प्रसन्न रहें.
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9 दुर्गा के बीज मंत्र
1. शैलपुत्री: ह्रीं शिवायै नम:।
2. ब्रह्मचारिणी: ह्रीं श्री अम्बिकायै नम:।
3. चन्द्रघण्टा: ऐं श्रीं शक्तयै नम:।
4. कूष्मांडा: ऐं ह्री देव्यै नम:।
5. स्कंदमाता: ह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम:।
6. कात्यायनी: क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम:।
7. कालरात्रि: क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम:।
8. महागौरी: श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:।
9. सिद्धिदात्री: ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम:।
मां दुर्गा के अलग-अलग रुप:
पहला दिन
कलश स्थापन के बाद सबसे पहले मां शैलफुत्री की पूजा होती है. ऐसे में इस दिन ह्रीं शिवायै नम: के जाप करें.
दूसरा दिन
दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी को पूजा जाता है ऐसे में आप ह्रीं श्री अम्बिकायै नम: के मंत्रो का जाप करें सुबह और शाम.
तीसरा दिन
तीसरे दिन माता के रुप चंन्द्रघण्टा की पूजा होती है,x इस दिन आप ऐं श्रीं शक्तयै नम: का जाप करें.
चौथा दिन
कूष्मांडा की पूजा चौथे दिन की जाती है और इस दिन माता के लिए आप ऐं ह्री देव्यै नम: का जाप करें.
पांचवा दिन
घर पर विधिपूर्वक आप इस दिन स्कंदामाता की पूजा करें और उनके बीज मंत्रह्रीं क्लीं स्वमिन्यै नम: का जाप करें.
छठा दिन
नवरात्रि के छठे दिन यानि षष्ठी को मां कात्यायनी की पूजा की जाती है, ऐसे में क्लीं श्री त्रिनेत्रायै नम: का जाप करें
सांतवा दिन
इस दिन को सप्तमी कहा जाता है और इस दिन मां कालरात्रि की पूजा होती है, ऐसे में मां को खुश करने के लिए आप क्लीं ऐं श्री कालिकायै नम: का जाप करें
आठवां दिन
आठंवे दिन या अष्टमी के पूजन का बेहद खास महत्व होता है, अष्टमी को मां महागौरी की पूजा बहुत धूमधाम के साथ की जाती है. इस दिन मां की पूजा में श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम: के मंत्रों का जाप करें.
नौवां दिन
आखिरी दिन यानि की नवमी इस दिन बहुत सारे लोग अपने नौ दिनों का व्रत खोलते हैं औऱ यज्ञ करते हैं. इस दिन सिद्धिदात्री मां की पूजा होती है और उनके लिए आप ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नम: मंत्रों का जाप करें.
लेखक
डॉ धनंजय पारधी
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